भारत की अर्थव्यवस्था आज एक शक्तिशाली हस्तक्षेप की तरह तेजी से उठती देखी जा रही है। विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), वगैरह प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने कई बार भारत के आर्थिक प्रदर्शन की प्रशंसा की है। तीव्र गति की शहरीकरण प्रक्रिया, युवा पीढ़ी की बढ़ती वृद्धि, डिजिटल क्रांतियों में अभूतपूर्व उत्थान, तथा बड़ी भागीदारी से वैश्विक व्यापार में अपने अंशदान से भारत को इस पद की ओर बढ़ाती हुई एक आर्थिक शक्ति बनने की ओर आगे बढ़ता गया है।
ऐतिहासिक प्रवृत्ति
1947 के स्वतंत्रता समय, भारत ने एक समाजवादी आर्थिक मॉडल अपनाते हुए एक प्रमुख भूमिका सरकार को दी। सार्वजनिक उपक्रमों पर ज़ोर दिया गया और निजी क्षेत्र को सीमित कर दिया। परिणामस्वरूप, भारत में आर्थिक विकास की गति सीमित रही। इस बीच लाइसेंस व्यवस्था, कराधान की ऊंची दर व प्रतिबंधों ने आर्थिक विकास को बाधित किया।
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य 2024 तक, भारत ने दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, और उम्मीद है कि निकट भविष्य में यह तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान प्रमुख है, इसके बाद विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों का स्थान आता है।
भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे विविध कार्यक्रमों की शुरुआत की है। इनका मुख्य लक्ष्य देश के भीतर विनिर्माण को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना, और वैश्विक निवेश को आकर्षित करना है। साथ ही, विदेशी कंपनियों जैसे Apple, Google, Amazon, और Tesla ने भारत में अपने निवेश में तेजी लाई है, जिससे रोजगार के अवसर और तकनीकी विकास दोनों में वृद्धि हो रही है।


